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हिरयामा रोग के लकà¥à¤·à¤£ | Symptoms Of Hirayama Disease
यह शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ में धीमा होता है और धीरे-धीरे पà¥à¤°à¤—तिशील बनता है. मरीजों को शà¥à¤°à¥‚ में लिखने में कठिनाई महसूस होती है, कमीज के बटन लगाना, à¤à¥‹à¤œà¤¨ मिलाना और हाथों में वसà¥à¤¤à¥à¤à¤‚ पकड़ना जैसे काम करना मà¥à¤¶à¥à¤•िल होता है. यह आमतौर पर à¤à¤• हाथ से शà¥à¤°à¥‚ होता है और फिर दूसरे को को à¤à¥€ जकड़ लेती है. बाद में बीमारी के दौरान हाथ पतले हो जाते हैं और पंजा विकृति विकसित करते हैं. ठंड के वातावरण के संपरà¥à¤• में आने पर कमजोरी का बढ़ना इस बीमारी की à¤à¤• और विशेषता है. आमतौर पर कोई संवेदी हानि नहीं होती है और मूतà¥à¤° या मल को पारित करने में कोई कठिनाई नहीं होती है. शायद ही कà¤à¥€ रोग हाथ और कंधे की मांसपेशियों को शामिल कर सकता है. शोष धीरे-धीरे बढ़ता है और पठार आम तौर पर कई वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ के दौरान बढ़ता है. उस समय तक हाथ पूरी तरह से बरà¥à¤¬à¤¾à¤¦ हो जाते हैं और उनकी कोई कारà¥à¤¯ कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ नहीं होती है.
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